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| Campus News |
National Youth Seminar at DSVV
29-5-2010 |
देसंविवि में दो दिवसीय राष्ट्रीय युवा संगोष्ठी का शुभारम्भ
देश के युवारक्त के सुनियोजित प्रवाह से होगा उज्जवल भविष्य का निर्माण - डॉ० प्रणव पण्ड्या
'क्या हो गया प्रकाशपुत्र को, अंधकार से जाकर मिल गया, तम से समझौता करके उसको नातेदार बना डाला ।उपरोक्त विचार संगोष्ठी का उदघाटन करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख एव़ं देसंविवि के कुलाधिपति डॉ० प्रणव पण्ड्या ने व्यक्त किये और उन्होंने कहा कि, यदि शरीर के रक्त का संचार रुक जाए या उसमें गड़बड़ी आ जाय तो शरीर में कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं । इसी तरह विश्व का रक्त यानी युवारक्त यदि गलत दिशा में बहने लगे तो विश्व के समक्ष वही समस्याएं खड़ी हो जाती हैं, जो आज के दिनों में वैश्विक स्तर पर देखी जा रही हैं ।उन्होंने ने कहा कि इस युवारक्त के सही दिशा में प्रवाह तथा विश्व के रचनात्मक नवनिर्माण के लिए युवा शक्ति के सुनियोजन हेतु यह अभियान चलाया जा रहा है ।डॉ० पण्ड्या ने कहा कि कोई व्यक्ति उम्र से युवा नहीं होता । युवा वह है जो आशावादी है, जागरुक है, उत्साही है। उन्होंने युवक-युवतियों से जीवन मूल्यों को अंगीकार करने का आहवान किया ।संगोष्ठी में हर राज्य में प्रांतीय युवा संगठनों की स्थापना के अलावा जिला युवा मण्डल, ग्रामीण युवा मंडल, गायत्री परिवार युथ ग्रुप तथा 'दिया' की इकाइयों के विस्तार का संकल्प युवा प्रतिनिधियों द्वारा लिया गया । |
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Highlight
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