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समर्पण, विसर्जन व विलय का दिन है 'गुरु पूर्णिमा' : डॉ पण्ड्या
29-7-2010 |
समर्पण, विसर्जन व विलय का दिन है 'गुरु पूर्णिमा' : डॉ पण्ड्या
गायत्री तीर्थ शान्तिकुन्ज में आयोजित गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में गायत्री परिजनों को सम्बोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि, गुरु पूर्णिमा समर्पण, विसर्जन और विलय का पर्व है । यह समय स्वयं की प्राण ऊर्जा को बढ़ाने का है । गुरु का स्थान मानव जीवन में सर्वोपरि होता है । गुरु को परमात्मा का दूसरा रुप कहा गया है । युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य के जीवन से उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि, जिस प्रकार गुरुवर ने अपने गुरु को सर्वस्व समर्पित कर दिया था, यह उसी समर्पण का फल है कि, उन्हें युगदृष्टा व नए नव सृजेता के रुप में जाना जा रहा है । गुरु के प्रति सच्चा समर्पण स्व निजता का विसर्जन है तथा श्रद्धा को सक्रियता में बदल कर ही गुरु की सच्ची सेवा की जा सकती है । कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए शान्तिकुन्ज अधिष्ठात्री शैल जीजी ने कहा कि, मानव जीवन के विकास के लिए तीन महत्वपूर्ण आधारों की आवश्यकता होती है - माँ, पिता व गुरु । उन्होंने कहा कि, सदगुरु की प्राप्ति से व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है । कार्यक्रम के अन्त में युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित साहित्य का करीब एक दर्जन भाषाओं मे अनुवादित किए गये साहित्य का विमोचन किया गया । कार्यक्रम में गायत्री परिवार के हजारों परिजन तथा देसंविवि के समस्त छात्र-छात्राओं तथा आचार्यों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया ।
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